आजकल, कॉलेज के छात्रों के बीच पढ़ाई के दौरान टिकटॉक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग आम हो गया है। कई छात्र बिना सोचे-समझे ही नोटिफिकेशन चेक करते रहते हैं। यह व्यवहार युवाओं की मानसिक स्थिति और सामाजिक संबंधों पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल मीडिया की लत युवाओं में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कम कर सकती है और चिंता व अवसाद का खतरा बढ़ा सकती है। अध्ययन बताते हैं कि सोशल मीडिया पर लगातार तुलना करने से आत्म-सम्मान में कमी आ सकती है। हालांकि, सोशल मीडिया का उपयोग सकारात्मक रूप से जानकारी प्राप्त करने और सामाजिक संपर्क बनाए रखने के लिए भी किया जा सकता है। इस मुद्दे पर अधिक शोध की आवश्यकता है ताकि युवाओं पर सोशल मीडिया के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझा जा सके और उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जा सके।