बीबीसी की एक जांच में पता चला है कि चैनल में अवैध रूप से लोगों की तस्करी करने वाले गिरोहों को छोटी नावों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। पहले प्रतिद्वंद्वी रहे ये आपराधिक समूह अब इस कमी के कारण मिलकर काम करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। तस्कर अब ‘मेगा-डिंगी’ नामक बड़ी नावों का उपयोग कर रहे हैं ताकि अधिक लोगों को एक साथ पार कराया जा सके। छोटी नावों की आपूर्ति में कमी के कारण ये गिरोह अपनी तस्करी गतिविधियों को जारी रखने के लिए नए तरीके ढूंढ रहे हैं। यह सहयोग तस्करों के बीच एक असामान्य बदलाव है, जो पहले प्रतिस्पर्धा करते थे। अधिकारियों का मानना है कि यह स्थिति तस्करी मार्गों को और खतरनाक बना सकती है। इस नई रणनीति से तस्करों पर निगरानी रखना और उन्हें रोकना भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

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