स्मार्ट चश्मे, जिनमें छिपे कैमरे लगे होते हैं, तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जिससे गोपनीयता को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। ये डिवाइस बिना किसी को बताए तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करने की क्षमता रखते हैं, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी का खतरा पैदा हो गया है। आलोचकों का तर्क है कि इससे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन हो सकता है और लोगों को हर समय निगरानी में रहने का डर रहेगा। कुछ देशों में इन चश्मों के उपयोग को लेकर नियम-कानून बनाने की मांग उठ रही है। समर्थकों का कहना है कि ये चश्मे उपयोगी हो सकते हैं, जैसे कि जानकारी रिकॉर्ड करना या तस्वीरें लेना, लेकिन गोपनीयता की रक्षा के लिए उचित दिशानिर्देशों का पालन करना ज़रूरी है। इस तकनीक के नैतिक और कानूनी पहलुओं पर बहस जारी है।