अर्थव्यवस्था की विकास दर अनुमान से कम रहने के कारण सरकार के राजस्व संग्रह पर असर पड़ा है। इस स्थिति से आगामी बजट में खर्च बढ़ाने की संभावना सीमित हो गई है। अर्थशास्त्रियों ने कम महंगाई दर को सकारात्मक बताया है, लेकिन राजकोषीय घाटे को लेकर चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को पहले से ही प्राथमिकता दी जा रही है, इसलिए बजट आवंटन में बड़ी वृद्धि मुश्किल है। सरकार को राजस्व बढ़ाने और खर्चों को संतुलित करने के लिए कठिन निर्णय लेने पड़ सकते हैं। मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में, शिक्षा बजट को लेकर बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित संसाधनों के बीच प्राथमिकताएं तय करना सरकार के लिए एक चुनौती होगी।
