जेलनिका में 47 वर्षीय शिक्षिका ज़ुज़ाना वी. की हत्या के मामले ने सिस्टम में एक बड़ी खामी उजागर की है। पीड़िता को अपने हिंसक पति की रिहाई के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी, क्योंकि उसने इसके लिए कोई आवेदन नहीं किया था। अधिकारियों का कहना है कि कानून के अनुसार, रिहाई की सूचना देने की जिम्मेदारी पीड़ित की होती है, न कि पुलिस या अदालतों की। इस मामले ने सुरक्षा और सूचना के अधिकार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित पीड़ितों को खतरे से अवगत कराने के लिए सिस्टम में सुधार की आवश्यकता है। यह घटना घरेलू हिंसा के मामलों में पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मौजूदा प्रक्रियाओं पर भी प्रकाश डालती है। सरकार इस मामले की जांच कर रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने पर विचार कर रही है।