स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के बयान में केवल दो वाक्य सत्य हैं। यह बयान एक हालिया जनमत संग्रह के संदर्भ में है, जिसे फिको सरकार ने आयोजित किया था। हालांकि, इस जनमत संग्रह को नागरिकता शिक्षा के एक हास्यपूर्ण पाठ के रूप में देखा जा रहा है। विवादास्पद मुद्दों पर मतदाताओं की राय जानने के बजाय, इसे राजनीतिक पैंतरेबाजी के एक रूप के रूप में अधिक माना जा रहा है। इस जनमत संग्रह में कम मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया, जो जनता की उदासीनता को दर्शाता है। आलोचकों का कहना है कि यह सरकार द्वारा जनता को गुमराह करने और अपनी नीतियों को सही ठहराने का एक प्रयास था। कुल मिलाकर, यह घटना स्लोवाकियाई राजनीति में एक विचित्र मोड़ रही है।