1993 में तुर्की के सिवास प्रांत में एक होटल में भीड़ द्वारा आग लगाने से मारे गए लोगों के परिवारों ने यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECtHR) में याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि तुर्की की संवैधानिक अदालत ने उनके मामले पर 12 वर्षों से कोई निर्णय नहीं लिया है। 'Cumhuriyet' दैनिक समाचार पत्र के अनुसार, परिवारों का कहना है कि घरेलू कानूनी प्रक्रिया में अत्यधिक देरी के कारण उन्हें यूरोपीय न्यायालय में जाना पड़ा। 2 जुलाई, 1993 को, एक भीड़ ने सिवास में एक होटल को आग लगा दी थी, जिसमें कई लोग मारे गए थे। पीड़ितों के परिवार लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन तुर्की की अदालतों में उन्हें संतोषजनक परिणाम नहीं मिला। इस देरी को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए, परिवारों ने ECtHR से हस्तक्षेप करने और न्याय दिलाने की अपील की है। यह मामला तुर्की में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों को उजागर करता है।