सिंगपास ने एक नई ‘पासकी’ प्रणाली शुरू की है जो मोबाइल उपकरणों को डिजिटल चाबी के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देगी। यह प्रणाली गूगल और एप्पल जैसी कंपनियों द्वारा विकसित खुले मानकों पर आधारित है। इस नई सुविधा से फ़िशिंग घोटालों का खतरा कम हो जाएगा क्योंकि पासकी पारंपरिक पासवर्ड की तुलना में अधिक सुरक्षित है। सिंगपास पासकी उपयोगकर्ता के डिवाइस से सीधे जुड़ी होती है, जिससे हैकर्स के लिए इसे चुराना मुश्किल हो जाता है। यह प्रणाली सिंगपास उपयोगकर्ताओं के लिए ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंचने का एक अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका प्रदान करती है। सरकार का लक्ष्य है कि इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाया जाए ताकि डिजिटल पहचान की सुरक्षा को बढ़ाया जा सके। यह कदम डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।