सर्बिया में छात्रों पर संवैधानिक व्यवस्था पर हमले के आरोप को लेकर एक कानूनी बहस छिड़ गई है। आरोपों के अनुसार, छात्रों ने ध्वनि तोप (sound cannon) का उपयोग करने का नाटक किया, जिसके बाद उन पर अपराध करने का आरोप लगाया गया। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ध्वनि तोप के उपयोग का केवल सिमुलेशन करने से भी आतंकवाद या संवैधानिक व्यवस्था पर हमले जैसे अपराध नहीं हो सकते। सिमुलेशन मात्र एक अभ्यास है और वास्तविक अपराध करने के लिए इरादे और कार्य की आवश्यकता होती है। इस मामले में, भले ही ध्वनि तोप का उपयोग करने का नाटक किया गया हो, लेकिन यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता। कानूनी विश्लेषण से पता चलता है कि छात्रों पर लगाए गए आरोप निराधार हैं क्योंकि सिमुलेशन से कोई वास्तविक खतरा उत्पन्न नहीं हुआ था। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध के अधिकार से जुड़े कानूनी मुद्दों को भी उजागर करता है।