नींद के दौरान स्ट्रोक (घात) का पता लगाना मुश्किल होता है, जिससे इलाज में देरी हो सकती है। इस देरी के कारण मस्तिष्क को कई घंटों तक नुकसान पहुँचता रहता है, जिसके परिणामस्वरूप विकलांगता या मृत्यु भी हो सकती है। स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है। शुरुआती पहचान और त्वरित चिकित्सा हस्तक्षेप महत्वपूर्ण हैं। नींद में होने वाले स्ट्रोक के लक्षणों को जानना आवश्यक है ताकि समय पर उचित कदम उठाए जा सकें। मस्तिष्क क्षति को कम करने के लिए "सुनहरा घंटा" (critical time window) में इलाज शुरू करना ज़रूरी है। इस स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जीवन रक्षक हो सकता है।
