एक अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन से पता चला है कि दुनिया में कभी दसियों हजार भाषाएँ बोली जाती थीं। लेकिन, वैश्वीकरण, साम्राज्यवाद और प्रौद्योगिकी के कारण भाषाओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। यह प्रवृत्ति भविष्य में और भी तेजी से भाषाओं को मिटा सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि कई भाषाएँ अब विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं। सांस्कृतिक विविधता के लिए भाषाओं का संरक्षण आवश्यक है। भाषाओं के नुकसान से ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का भी नुकसान होता है। इस संकट पर तत्काल ध्यान देने और भाषाओं को बचाने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है।

English
Français
Español
हिन्दी
中文