प्रधानमंत्री शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने १०० दिनों के कार्यकाल में डिजिटल शासन और भ्रष्टाचार विरोधी उपायों में कुछ सफलता हासिल की है। हालाँकि, सरकार के १००-सूत्रीय एजेंडे का लगभग दो-तिहाई हिस्सा अभी भी अधूरा है या केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है। डेटा से पता चलता है कि सरकार ने कुछ प्रमुख लक्ष्यों को प्राप्त किया है, लेकिन समग्र कार्यान्वयन धीमा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि संसाधनों की कमी और नौकरशाही बाधाओं के कारण कई योजनाओं को लागू करने में देरी हुई है। सरकार अब शेष वादों को पूरा करने के लिए रणनीति बनाने में जुट गई है। यह स्थिति सरकार के लिए एक चुनौती है, क्योंकि जनता की अपेक्षाएं अधिक हैं। आगामी महीनों में सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।