न्यायिक कर्मचारियों के संघ के अध्यक्ष नेमान्या ड्यूरिक ने आज संसद को भेजे गए तथाकथित "मर्डीक कानूनों" में प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि वेनिस आयोग को भेजा गया कानून का मसौदा, संसद में प्रस्तुत मसौदे से भिन्न है। ड्यूरिक ने इस विसंगति पर सवाल उठाया है और पारदर्शिता की कमी पर प्रकाश डाला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायिक प्रणाली की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कानून का मसौदा सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद तैयार किया जाना चाहिए। यह मुद्दा कानून के शासन और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता से संबंधित है। ड्यूरिक ने आगे कहा कि संघ इस मामले पर बारीकी से निगरानी रखेगा और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा कि न्यायिक सुधार कानून न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर न करे।
