सामाजिक अनुसंधान ब्यूरो (बिरोदी) ने आरटीएस के एक कार्यक्रम के विश्लेषण के आधार पर चिंता व्यक्त की है। यह कार्यक्रम कथित संगठित अपराध और ध्वनि तोप के उपयोग से संबंधित था। बिरोदी का कहना है कि सार्वजनिक प्रसारण सेवा ने मीडिया सेवाओं के प्रावधान में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया हो सकता है। विश्लेषण में कार्यक्रम की प्रस्तुति और सामग्री में संभावित कमियों को उजागर किया गया है। बिरोदी ने निष्पक्ष रिपोर्टिंग और विभिन्न दृष्टिकोणों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस मामले में आगे जांच की मांग की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सार्वजनिक प्रसारण सेवा अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही ढंग से कर रही है। यह घटना मीडिया स्वतंत्रता और सार्वजनिक हित में सूचना के अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाती है।