नार्वे में, एक 18 वर्षीय युवक पर दो लोगों को एक गैरेज परिसर में चाकू मारने का आरोप था। अदालत में, युवक ने दावा किया कि उसने आत्मरक्षा में कार्य किया था। मामले की सुनवाई के बाद, अदालत ने उसे आरोपों से बरी कर दिया। यह निर्णय आत्मरक्षा की सीमाओं और परिस्थितियों पर सवाल उठाता है। इस मामले ने नार्वे में व्यापक चर्चा पैदा कर दी है, खासकर आत्मरक्षा के कानूनी पहलुओं के संबंध में। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होता है कि आत्मरक्षा में किए गए कार्य की परिस्थितियों का मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण है। आगे की जांच में, यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि चाकूबाजी की घटना के क्या कारण थे।