प्रसिद्ध पटकथा लेखक मिचेलिस रेप्पस से व्यंग्य की सीमाओं पर राय मांगी गई। उन्होंने कहा कि किसी समूह को हंसाने के उद्देश्य से नीचा दिखाना या अपमानित करना अनुचित है। रेप्पस का मानना है कि व्यंग्य रचनात्मक और विचारोत्तेजक होना चाहिए, न कि केवल दूसरों को ठेस पहुँचाने वाला। यह टिप्पणी व्यंग्य की नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर चल रही बहस के संदर्भ में आई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हास्य का उपयोग विभाजन या भेदभाव को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। रेप्पस की राय व्यंग्यकारों और कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुस्मारक है कि वे अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता का प्रयोग जिम्मेदारी से करें। यह बहस समाज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करने के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को उजागर करती है।
