शंघाई सहयोग संगठन (एस.सी.ओ.) ने परमाणु सुरक्षा और संरक्षा पर अपना पहला समर्पित घोषणापत्र जारी किया है। यह घोषणापत्र शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों की निंदा करता है और व्यापक परमाणु शासन के सवालों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर व्यावहारिक सहयोग की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। बिश्केक में एस.सी.ओ. की 25वीं वर्षगांठ के शिखर सम्मेलन में चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान सहित सभी 10 सदस्य देशों के नेताओं द्वारा इस दस्तावेज को अपनाया गया। इस घोषणापत्र में परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। यह कदम वैश्विक स्तर पर परमाणु सुरक्षा के प्रति एस.सी.ओ. की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ईरान पर नए हमलों के बीच यह घोषणापत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। एस.सी.ओ. का यह रुख अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रयासों का भी समर्थन करता है।

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