शिक्षा मंत्रालय ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब स्कूलों को छात्रों से नागरिकता संबंधी दस्तावेजों की हार्ड कॉपी मांगने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और कागजी कार्रवाई को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे पहले, स्कूलों में प्रवेश या अन्य प्रक्रियाओं के लिए जन्म प्रमाण पत्र और राष्ट्रीय पहचान पत्र जैसी मूल दस्तावेजों की आवश्यकता होती थी। मंत्रालय का यह कदम डिजिटल दस्तावेज़ों को स्वीकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इस फैसले से छात्रों और अभिभावकों को काफी सुविधा होगी, क्योंकि अब उन्हें दस्तावेजों की प्रतियां बनवाने और जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह प्रशासनिक बोझ को कम करने और प्रक्रियाओं को अधिक कुशल बनाने में मदद करेगा।