स्पेन से शुरू हुए एक नए चलन में, कुछ स्कूल खेल के मैदानों से गेंदों को हटाने लगे हैं। फुटबॉल, बास्केटबॉल और रग्बी जैसी गेंदें अब छात्रों के लिए उपलब्ध नहीं हैं। स्कूलों का तर्क है कि यह कदम टूटे हुए शीशे जैसी समस्याओं से निपटने के लिए नहीं है, बल्कि यह माना जा रहा है कि गेंदें लड़कों के लिए "विषैली" हैं। यह कदम लैंगिक रूढ़िवादिता और खेल के मैदान में समानता के मुद्दों को जन्म दे रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह निर्णय बच्चों के शारीरिक गतिविधि और सामाजिक विकास को सीमित करता है। इस नीति के पीछे का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह लड़कों के व्यवहार को लेकर चिंताओं से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। इस फैसले से छात्रों और अभिभावकों में बहस छिड़ गई है।