स्‍थानीय सरकारें संघीय हस्तक्षेप का विरोध कर रही हैं, वहीं निजी स्‍कूलों को नीति में निश्चितता और शिक्षकों के लिए बेहतर वेतन एवं भत्‍तों की आवश्‍यकता है। यह स्‍कूल बिल, निर्णय लेने की प्रक्रिया और भुगतान की जिम्‍मेदारी को लेकर एक जटिल विवाद का केंद्र बन गया है। स्‍थानीय प्रशासन, शिक्षा नीति पर अपने अधिकार को बनाए रखना चाहता है, जबकि निजी स्‍कूल एक स्‍पष्‍ट और स्थिर नीतिगत ढांचे की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपने शिक्षकों को आकर्षित कर सकें और उन्‍हें बनाए रख सकें। शिक्षकों के बेहतर वेतन और भत्‍तों की मांग भी इस बिल को और जटिल बना रही है। इस मुद्दे पर केंद्र और स्‍थानीय सरकारों के बीच सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। इस बिल का भविष्‍य अनिश्चित है, क्‍योंकि सभी हितधारकों को एक समझौते पर पहुंचना है जो सभी के लिए उचित हो। इस स्थिति से छात्रों की शिक्षा पर असर पड़ सकता है।