अब्दुल्ला बिन सलाम, एक प्रसिद्ध यहूदी विद्वान, इस्लाम से परिचित हुए जब उन्होंने टोरा (Torah) का गहन अध्ययन किया। टोरा और अन्य प्राचीन धर्मग्रंथों में पैगंबर मुहम्मद के आगमन की भविष्यवाणी की गई थी, जिससे वे प्रभावित हुए। उनकी विशेषज्ञता और ज्ञान ने उन्हें इस्लाम की सच्चाई को समझने में मदद की। अब्दुल्ला बिन सलाम ने महसूस किया कि इस्लाम उन भविष्यवाणियों की पूर्ति है। इसके बाद उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। यह घटना दर्शाती है कि कैसे प्राचीन धर्मग्रंथों का अध्ययन लोगों को इस्लाम की ओर ले जा सकता है। उनका रूपांतरण इस्लाम के सार्वभौमिक संदेश का प्रमाण है।