सरकार ने बचत योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज पर कर की दर को दोगुना कर दिया है। इस फैसले से मध्यम वर्ग के लोगों की बचत पर असर पड़ेगा और उनकी निवेश योजनाओं से मिलने वाला लाभ कम हो जाएगा। पहले यह कर दर कम थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर निवेशकों को अधिक कर चुकाना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बचत करने के लिए प्रोत्साहन कम हो सकता है। सरकार का कहना है कि यह फैसला राजस्व बढ़ाने के लिए आवश्यक था। इस बदलाव के बाद, बचत योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों को अपनी वित्तीय योजनाओं पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता हो सकती है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।