उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते की कानूनी टीम ने उनके खिलाफ दर्ज गंभीर धमकी के मामले को खारिज करने की अपनी याचिका पर मौखिक बहस कराने की औपचारिक मांग की है। उनका तर्क है कि इस मामले के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं और यह राष्ट्रपति तक भी पहुंच सकता है। वकीलों का कहना है कि शिकायत के निहितार्थ व्यापक हैं और शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति को भी प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने इस मामले की गंभीरता और संभावित राजनीतिक प्रभाव को रेखांकित किया। मौखिक बहस से अदालत को मामले की बारीकियों को समझने और एक उचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। दुतेर्ते की टीम का मानना है कि शिकायत निराधार है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। इस मामले पर अदालत के फैसले का राजनीतिक गलियारों में महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।