कनाडा के एक पूर्व सैन्य कमांडर के अनुसार, यूक्रेन युद्ध में रूस की सबसे बड़ी कमजोरी सैन्य नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक है। उनका कहना है कि क्रेमलिन एक महंगा संघर्ष बनाए रखने के लिए मजबूर है, लेकिन उसे युद्ध के मैदान में सीमित सफलता मिल रही है। आक्रमण के लिए कोई वैध आधार नहीं होने के कारण, समय के साथ रूस की युद्ध जारी रखने की क्षमता कमजोर हो सकती है। यह स्थिति रूस के संसाधनों पर भारी दबाव डाल रही है। विशेषज्ञ का मानना है कि यह दीर्घकालिक रूप से रूस के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। यूक्रेन में सीमित लाभ के लिए भारी निवेश, रूस की रणनीति पर सवाल खड़े करता है।