यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सेना को सफलता नहीं मिल पा रही है। हालांकि, इस आक्रमण के परिणामस्वरूप रूस का वैश्विक प्रभाव तेज़ी से कम हो रहा है। सीरिया, वेनेजुएला, हंगरी और मोल्दोवा के बाद, अब आर्मेनिया में भी रूस का प्रभाव कमज़ोर हो रहा है। आर्मेनिया में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों में रूस समर्थक दलों को हार का सामना करना पड़ा है। यह स्थिति दर्शाती है कि रूस अपने पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र में भी अपनी पकड़ खो रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट रूस को एक कमज़ोर शक्ति के रूप में स्थापित कर सकती है। यह घटनाक्रम रूस की विदेश नीति और भविष्य की रणनीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।