रूस में हाल के वर्षों में православ चर्च का प्रभाव तेजी से बढ़ा है, जो दैनिक जीवन में सर्वव्यापी हो गया है। यह वृद्धि राजनीतिक समर्थन के साथ जुड़ी हुई है, जिससे असहमति को दबाने के लिए धर्म का उपयोग करने की चिंताएं बढ़ गई हैं। 'पुसी रायट' समूह की दो सदस्यों को रूसी रूढ़िवादी चर्च के प्रमुख, पैट्रिआर्क किरिल के विरोध में प्रदर्शन करने और पुतिन को हटाने के लिए प्रार्थना करने के लिए लगभग दो साल तक श्रम शिविर में बिताने के लिए मजबूर किया गया था। यह घटना धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है। लेख में पूछा गया है कि क्या रूस में रूढ़िवादी धर्म वास्तव में पवित्र है, या यह राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्थिति रूस में धर्म और राज्य के बीच जटिल संबंधों को दर्शाती है, और सत्ता के लिए धार्मिक संस्थानों के संभावित दुरुपयोग पर प्रकाश डालती है।
