रूसी विपक्षी नेता बोरिस नदेज्दिन ने संसदीय चुनावों से अपना नाम वापस ले लिया है। उन पर "चरमपंथी प्रतीकों" के इस्तेमाल के लिए जुर्माना लगाया गया था। नदेज्दिन ने कहा कि उन्हें "खामोश कर दिया गया" है और उन्हें राजनीति से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें "जीवित रहने और स्वतंत्र रहने" की उम्मीद है। यह कदम रूस में राजनीतिक विरोध के प्रति बढ़ते दमन का संकेत देता है। इस फैसले से रूसी चुनावों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। नदेज्दिन का मानना है कि उन्हें जानबूझकर चुनाव से बाहर करने का प्रयास किया गया है।