रूसी सेना की कुख्यात ‘ओरेश्निक’ मिसाइल की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। नई जानकारी के अनुसार, यह मिसाइल उतनी घातक नहीं है जितनी मानी जा रही थी। मिसाइल में लगा जाइरोस्कोप, जो इसके मार्ग को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, ठीक से काम नहीं कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीकी खराबी के कारण मिसाइल की सटीकता और प्रभावशीलता कम हो जाती है। इसे पहले ‘फ्रेंकस्टीन की दानव’ के रूप में वर्णित किया गया था, लेकिन अब इसकी वास्तविक क्षमता पर पुनर्विचार किया जा रहा है। इस खुलासे से मिसाइल के खतरे का आकलन प्रभावित हो सकता है। फिलहाल, रूसी पक्ष से इस बारे में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
