रूसी जनरल और स्टेट ड्यूमा के सदस्य आंद्रेई गुरुल्योव ने स्वीकार किया है कि उन्होंने 2014 में डोनबास में लड़ाई के दौरान यूक्रेनी नागरिकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। गुरुल्योव ने इस घटना को याद करते हुए कहा, “अगर जरूरत पड़ी तो भगवान मुझे माफ कर देंगे।” यह कबूलनामा डोनबास संघर्ष के दौरान रूसी सेना की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है। गुरुल्योव का बयान रूसी अधिकारियों द्वारा लगातार इस क्षेत्र में अपनी सीधी भागीदारी से इनकार करने के विपरीत है। इस खुलासे से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश फैलने की संभावना है और युद्ध अपराधों की जांच की मांग तेज हो सकती है। यह घटना 2014 में शुरू हुए डोनबास युद्ध के दौरान हुई थी, जिसमें यूक्रेन की सरकार और रूसी समर्थित अलगाववादियों के बीच संघर्ष हुआ था। गुरुल्योव के इस बयान से संघर्ष की भयावहता और नागरिकों पर इसके प्रभाव का पता चलता है।