सर्गेई और एलिसा सडोनिकोव, पहले पुतिन के उत्साही समर्थक थे, लेकिन यूक्रेन में युद्ध की वास्तविकता से निराश हो गए। उन्होंने रूसी सेना छोड़ दी और तुर्की भागने का फैसला किया। इस जोड़े ने आठ दिनों तक कश्ती में यात्रा करके तुर्की पहुंचा। अब उन्हें रूस वापस भेजने का खतरा है। वे यूक्रेन में युद्ध के भयावह अनुभवों से त्रस्त थे और राजनीतिक शरण की उम्मीद कर रहे हैं। उनकी कहानी रूसी सरकार के दुष्प्रचार और युद्ध के वास्तविक प्रभावों के बीच विरोधाभास को उजागर करती है। तुर्की में उनकी स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है।