रूसी सेना यूक्रेन युद्ध में भारी समस्याओं का सामना कर रही है, जिसमें वित्तीय संकट भी शामिल है। जानकारी के अनुसार, सेना मृतकों और लापता सैनिकों को भी 'डेजर्टर' (परित्यक्त) बता रही है ताकि मुआवज़ा देने से बचा जा सके। परिजनों का कहना है कि वे अपने प्रियजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और उनकी स्थिति के बारे में अनिश्चित हैं। वे सेना के आधिकारिक बयानों पर विश्वास नहीं करते हैं। परिवार वालों को संदेह है कि सेना जानबूझकर गलत जानकारी फैला रही है। इस रणनीति से सेना की आर्थिक बचत हो रही है, लेकिन परिवारों को भारी मानसिक पीड़ा हो रही है। यह मामला पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।