रूस के सरकारी सांख्यिकीविदों ने अर्थव्यवस्था में वृद्धि दर्ज की है, लेकिन अर्थशास्त्रियों को इस आंकड़े पर संदेह है। यह वृद्धि मुख्य रूप से युद्ध पर खर्च और कुछ अस्थायी कारकों पर आधारित है। पहले छमाही में अर्थव्यवस्था लगभग स्थिर रही थी, जिसके बाद पुतिन ने अधिकारियों को अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का आदेश दिया था। विश्लेषकों का मानना है कि यह वृद्धि टिकाऊ नहीं होगी और यह केवल पुतिन के आदेश के अनुपालन का परिणाम है। युद्धकालीन व्यय ने अस्थायी रूप से आर्थिक प्रदर्शन को बेहतर दिखाने में मदद की है, लेकिन यह दीर्घकालिक आर्थिक स्वास्थ्य का संकेत नहीं है। इस आंकड़े की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह स्वतंत्र आकलन से मेल नहीं खाती है।