रूसी सेना द्वारा कब्ज़ा किए गए यूक्रेन के क्षेत्रों से पत्रकारों का अपहरण किया जा रहा है। इन पत्रकारों को वर्षों तक जबरन श्रम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसके साथ यातना और अमानवीय स्थितियाँ भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अपहरण किए गए पत्रकारों को रूसी न्याय प्रणाली के तहत मुकदमा चलाने या उन्हें जबरन श्रम शिविरों में भेजने की तैयारी की जा रही है। यह स्थिति मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता पैदा कर रही है। इस तरह के कार्यों को रूसी सरकार की ओर से पत्रकारों को डराने और स्वतंत्र मीडिया को दबाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। पीड़ितों के साथ अमानवीय व्यवहार की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और कल्याण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की जा रही है।