ग्रामीण महिलाओं के लिए शुरू की जाने वाली कई परियोजनाएँ शुरू होने से पहले ही विफल हो जाती हैं। अक्सर, इन परियोजनाओं को महिलाओं की वास्तविक ज़रूरतों और प्राथमिकताओं को समझे बिना ही तैयार कर लिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की बात सुनना और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार परियोजनाएँ बनाना सफलता की कुंजी है। संस्थागत और वित्तीय सहायता प्रदान करना पर्याप्त नहीं है, यदि परियोजनाएँ जमीनी हकीकत से दूर हैं। यह ज़रूरी है कि परियोजनाएँ महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय, उनकी ज़रूरतों को पूरा करने पर केंद्रित हों। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और उनकी राय को महत्व देना, परियोजनाओं को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस दृष्टिकोण से, परियोजनाओं की विफलता दर को कम किया जा सकता है और ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।