राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से बेहतर तरीके से युवा पीढ़ी, यानी जनरेशन ज़ेड तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की है। बीजेपी जहाँ जनरेशन ज़ेड को साधने में कुछ हद तक पिछड़ गई, वहीं आरएसएस ने इस पीढ़ी को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए प्रभावी रणनीतियों का इस्तेमाल किया। आरएसएस ने तकनीक और सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए युवाओं तक अपनी विचारधारा पहुंचाई। संघ ने युवाओं को जोड़ने के लिए कई नए कार्यक्रम और पहलों की शुरुआत की, जो बीजेपी के प्रयासों से अधिक सफल रहे। विश्लेषकों का मानना है कि आरएसएस की जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन और लंबे समय से चल रहे कार्यों ने इसे इस पीढ़ी के युवाओं तक पहुंचने में मदद की। इस सफलता से आरएसएस को भविष्य में युवाओं को अपनी विचारधारा से जोड़ने में और भी आसानी होगी। बीजेपी को अब जनरेशन ज़ेड के साथ जुड़ने के लिए अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।