हाल ही में बुखारेस्ट में लगे पोस्टरों ने समकालीन दबावों को उजागर किया है, जिसमें हमेशा सक्रिय रहने, सब कुछ हासिल करने और सब कुछ करने में सक्षम होने की अपेक्षा शामिल है। एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि 40% युवा लगातार चिंता का अनुभव कर रहे हैं। यह चिंता युवाओं पर 'कुछ भी चूकने' के डर और समाज द्वारा निर्धारित अत्यधिक अपेक्षाओं के कारण है। युवाओं पर लगातार यह दबाव रहता है कि वे दूसरों की तरह दिखें, पैसा कमाएं, अपना घर बनाएं और नवीनतम रुझानों के साथ बने रहें। ये अपेक्षाएं युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं और चिंता के स्तर को बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञ इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं और युवाओं पर पड़ने वाले इस दबाव को कम करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं।