राष्ट्रपति निकुशोर डैन ने संसद को खनन कानून में संशोधन से संबंधित एक आपातकालीन अध्यादेश (संख्या 77/2024) की समीक्षा के लिए भेजा है। यह अध्यादेश, कानून संख्या 85/2003 में बदलाव और पूरक प्रावधानों से संबंधित है। राष्ट्रपति का तर्क है कि कानून का वह रूप जो प्रतिनिधि सभा (चेंबर ऑफ डेप्युटीज) ने अपनाया है, वह सीनेट द्वारा अनुमोदित रूप से काफी भिन्न है। इस अंतर से संविधान में निहित द्विसदनीयता के सिद्धांत का उल्लंघन होता है। राष्ट्रपति ने इस मुद्दे पर संसद से पुनर्विचार करने का आग्रह किया है ताकि दोनों सदनों के बीच सहमति बनी रहे और संवैधानिक प्रावधानों का पालन किया जा सके। यह कदम कानून निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है।