राष्ट्रपति निकुशोर डैन ने ऊर्जा क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन से संबंधित एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने इस संबंध में सरकार के आपातकालीन अध्यादेश में संशोधन और पूरक कानून को संवैधानिक न्यायालय (CCR) भेजा है। राष्ट्रपति ने इस कानून की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुए एक औपचारिक चुनौती दर्ज की है। यह मामला अब न्यायालय के विचाराधीन है जो तय करेगा कि कानून संवैधानिक है या नहीं। इस कानूनी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऊर्जा नीति देश के बुनियादी नियमों के अनुरूप हो। इस कदम से ऊर्जा क्षेत्र में डीकार्बोनाइजेशन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। न्यायालय का अंतिम निर्णय भविष्य की ऊर्जा रणनीतियों के लिए निर्णायक होगा।