रोसियो सैन मिगुएल, लगभग दो साल की जेल के बाद, अपनी गिरफ्तारी और कैद की मनमानी, अपने परिवार पर दबाव और ब्राज़लेट ब्लैंको मामले में अनियमितताओं के बारे में बताती हैं। वह कहती हैं कि क्रूरता के सामने घृणा के साथ बाहर न निकल पाना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। यह मामला वेनेजुएला में राजनीतिक उत्पीड़न और मानवाधिकारों के हनन पर प्रकाश डालता है। सैन मिगुएल के अनुभव से पता चलता है कि कैसे सरकार विरोधियों को चुप कराने के लिए दबाव की रणनीति का इस्तेमाल करती है। यह घटना वेनेजुएला की न्याय प्रणाली में व्याप्त अनियमितताओं को भी उजागर करती है। उनकी कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो अन्याय के खिलाफ खड़े हैं। यह मामला 'TalCual' में प्रकाशित हुआ है।