चेक गणराज्य में हर साल लगभग 2100 महिलाओं को गर्भाशय कैंसर का पता चलता है। इनमें से लगभग 400 महिलाएं इस बीमारी से मर जाती हैं, जिनमें से कई मौतें अनावश्यक हैं। चार्ल्स यूनिवर्सिटी के तीसरे चिकित्सा संकाय के स्त्री रोग विशेषज्ञ माइकल हालास्का के अनुसार, आनुवंशिकी और पीएमओएस सिंड्रोम के अलावा, मोटापा इस खतरनाक बीमारी के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बीमारी रोकथाम योग्य है और शुरुआती निदान से उपचार सफल हो सकता है। मोटापा बढ़ने से गर्भाशय कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना महत्वपूर्ण है। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित जांच और समय पर उपचार से इस बीमारी से बचा जा सकता है। यह बीमारी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
