इंडोनेशिया में तलाक के बाद बच्चों की कस्टडी को लेकर विवादों के मामले बढ़ रहे हैं। इस्लामी कानून में, बच्चों की कस्टडी को ‘हदना’ कहा जाता है। यह कानून माता-पिता के बीच बच्चों की देखभाल और परवरिश के अधिकारों को निर्धारित करता है। आमतौर पर, छोटी उम्र के बच्चों की कस्टडी मां को दी जाती है, क्योंकि उनकी शुरुआती देखभाल के लिए मां अधिक उपयुक्त मानी जाती है। हालांकि, पिता की भूमिका को भी कम नहीं आंका जाता और वे बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हदना के नियम बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए तय किए जाते हैं, जिसमें उनकी धार्मिक शिक्षा और नैतिक विकास भी शामिल है। अदालतें इन नियमों के आधार पर ही कस्टडी के मामलों का फैसला करती हैं।