विश्व भर में उदारवादी-रूढ़िवादी दलों के लिए मुक्त बाजार, कम कर और सरकारी जवाबदेही प्रमुख शब्द रहे हैं। लेकिन, दक्षिणपंथी उभार ने उन्हें कनिष्ठ भागीदार बना दिया या उनकी बाजार अर्थव्यवस्था के मूल को छीन लिया। यह स्थिति इन दलों के लिए एक चुनौती बन गई है। विशेष रूप से, जर्मनी की क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) को इससे सीखना होगा। दक्षिणपंथी विचारधारा के बढ़ने से उदारवादी-रूढ़िवादी दलों की नीतियों और अस्तित्व पर सवाल उठने लगे हैं। उन्हें अपनी विचारधारा को फिर से परिभाषित करने और मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए नए रास्ते खोजने होंगे। यह बदलाव उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।