रब्बी अविही एपस्टाइन, जो एक सैन्य रिजर्व यूनिट के प्रमुख हैं, ने हाल ही में बताया कि सैनिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती युद्ध नहीं, बल्कि थकान है। उन्होंने बताया कि रिजर्व ड्यूटी के दौरान, बेस पर शब्बात (यहूदी विश्राम दिवस) का पालन करना सैनिकों के लिए एक महत्वपूर्ण और उत्साहवर्धक अनुभव होता है। एपस्टाइन के अनुसार, सैनिकों को आगे बढ़ने की प्रेरणा और शक्ति आंतरिक मूल्यों और विश्वास से मिलती है। उन्होंने युद्ध के मैदान की कठिनाइयों से निपटने के लिए मानसिक और आध्यात्मिक तैयारी के महत्व पर जोर दिया। एपस्टाइन ने सैनिकों के मनोबल को बनाए रखने और उन्हें प्रेरित रखने के लिए अपने अनुभवों और दृष्टिकोणों को साझा किया। उनका मानना है कि सैनिकों को शारीरिक रूप से तैयार करने के साथ-साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से भी मजबूत बनाना आवश्यक है। यह साक्षात्कार सैनिकों के जीवन और चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।
