एक नई रिपोर्ट ने दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता की वैधता को चुनौती दी है। रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि मध्यस्थता कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण थी और चीन की संप्रभुता का उल्लंघन करती है। यह दावा करता है कि मध्यस्थता का कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं है और चीन को इसका पालन करने की आवश्यकता नहीं है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मध्यस्थता अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी। इस रिपोर्ट के प्रकाशन से दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय विवाद और बढ़ सकता है। यह चीन और अन्य दावों वाले देशों के बीच तनाव को बढ़ा सकता है। रिपोर्ट में इस मुद्दे पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।