एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली राज्य ने 7 अक्टूबर की घटनाओं का उपयोग अरब नागरिकों की आवाज़ को दबाने के लिए व्यवस्थित रूप से किया। ज़ुलात इंस्टीट्यूट द्वारा जारी इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने ग़ैरक़ानूनी गिरफ़्तारियों, विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध और शिक्षाविदों के उत्पीड़न के माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाया। रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध की आड़ में, अरब नागरिकों को निशाना बनाया गया और उनके अधिकारों का उल्लंघन किया गया। यह कार्रवाई व्यवस्थित थी और इसका उद्देश्य अरब समुदाय को चुप कराना था। इंस्टीट्यूट का तर्क है कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इजरायली समाज में विभाजन को बढ़ावा देता है। रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि इन आरोपों की गहन जांच होनी चाहिए और ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। यह घटनाक्रम इजरायल में नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।