धार्मिक-राष्ट्रवादी आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। उन्हें "तोराह और कार्य" के आदर्श को एक धार्मिक और राजनीतिक विचारधारा के रूप में फिर से स्थापित करने का ऐतिहासिक अवसर मिला है। यदि धार्मिक-राष्ट्रवादी जनता ने नेतन्याहू-हरदी गुट को एक और कार्यकाल दिया, तो यह उनकी विचारधारा की अंतिम स्वीकृति मानी जाएगी। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा करने से आंदोलन अपनी मूल मान्यताओं से समझौता कर सकता है। यह निर्णय आंदोलन के भविष्य और इजरायल की राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। इस गठबंधन के साथ बने रहने से आंदोलन की विचारधारा कमजोर हो सकती है, जबकि अलग होने से राजनीतिक अस्थिरता आ सकती है। यह स्थिति धार्मिक-राष्ट्रवादी आंदोलन के लिए एक कठिन विकल्प प्रस्तुत करती है।