एक विशेषज्ञ, अकीवा नोविक ने धार्मिक अतिवादियों (हरदीम) के विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि उनके व्यवहार से समाज में आक्रोश बढ़ रहा है। नोविक के अनुसार, जब ये समूह सड़कों पर उपद्रव करते हैं या ‘बिन ज़मानिम’ नामक अपने अवकाश पर जाते हैं, तो लोगों में उनके प्रति नफ़रत और बढ़ती है। उन्होंने ‘शुद्ध तोराह अध्ययनों’ के नाम से जाने जाने वाले इस समूह के व्यवहार को भड़काऊ बताया है। नोविक का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से धार्मिक समूहों के प्रति नकारात्मक भावनाएं मजबूत होती हैं। यह टिप्पणी सार्वजनिक प्रसारण निगम के एक पत्रकार द्वारा की गई है। इस बयान से धार्मिक समूहों के व्यवहार और समाज पर उसके प्रभाव को लेकर बहस छिड़ सकती है। नोविक के विचार इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
