एक अर्थशास्त्री के अनुसार, शरणार्थियों को रोज़गार देने के प्रस्ताव के रास्ते में कानूनी मुद्दे और स्थानीय विरोध प्रमुख बाधाएं हैं। ये मुद्दे स्पष्ट नीति ढांचे के अभाव और 2017 में शुरू किए गए एक पायलट परियोजना की विफलता के कारण उत्पन्न हुए हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि बिना उचित नीति के, शरणार्थियों को कानूनी रूप से रोज़गार देना मुश्किल है। स्थानीय समुदायों की आपत्तियों को भी संबोधित करना आवश्यक है, जो रोज़गार और संसाधनों के वितरण को लेकर चिंता व्यक्त करते हैं। इस परियोजना की सफलता के लिए सरकार को एक व्यापक नीति बनानी होगी और स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित करना होगा। वर्तमान स्थिति में, शरणार्थियों को रोज़गार देने की योजना कानूनी और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रही है। इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
