दक्षिण अफ्रीका में विदेशी विरोधी भावना बढ़ रही है, जिसके चलते राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा आप्रवासन मुद्दे पर नियंत्रण पाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उनका प्रतिक्रिया मौजूदा नीतियों और प्रस्तावों पर आधारित है, जिनकी मानवाधिकार समूहों ने पहले आलोचना की है। राष्ट्रपति रामाफोसा का यह कदम, ज़ेनोफोबिक समूहों के बढ़ते प्रभाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये योजनाएं पहले भी विफल साबित हुई हैं और इनसे समस्या का समाधान होने की संभावना कम है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ये नीतियां अप्रवासियों के अधिकारों का उल्लंघन कर सकती हैं। इस पहल से आप्रवासन नीति में कोई बड़ा बदलाव आने की उम्मीद नहीं है, बल्कि यह पहले से मौजूद ढांचे को ही दोहराती है। राष्ट्रपति रामाफोसा सरकार पर अब इन योजनाओं की प्रभावशीलता साबित करने का दबाव होगा।