दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा ने प्रवासन को लेकर एक विशेष संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने विशेष हस्तक्षेपों की घोषणा की और इसे एक प्रमुख राष्ट्रीय चुनौती बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने बिना किसी ठोस सबूत के ही जनता की चिंता को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। राष्ट्रपति के इस कदम से प्रवासन को लेकर अनावश्यक भय और तनाव का माहौल बन सकता है। सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रवासन वास्तव में एक संकट है या नहीं, लेकिन उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ दिया है। इस संबोधन के कारण प्रवासियों के प्रति नकारात्मक धारणा और बढ़ सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि सरकार को पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए थी, उसके बाद ही इस तरह का कदम उठाना चाहिए था। यह कदम राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया प्रतीत होता है।